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बुधवार, 17 मार्च 2010

आइडिया

एक भिखारी का बाप मर गया
भिखारी बोला
कमबख्त
गरीबी में आटा गीला कर गया
चौराहे पर बैठता था
दस-पाँच रूपये रोज कमाता था
घर का खर्च तो
वैसे भी नहीं चल पाता था
अंतिम संस्कार कैसे करूं
तन पर लंगोटी भी नहीं जो गिरवी धरूं
तभी
उसके दिमाग में एक आइडिया आया
उसने
रात के अंधेरे में
बाप की लाश को
बीच चौराहे पर फिंकवाया
अगले दिन
पुलिस ने एक्सीडेन्ट समझकर
लाश को लावारिस घोषित कर दिया
और
सरकारी खर्चे पर
लाश का अंतिम संस्कार कर दिया ।

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