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बुधवार, 19 सितंबर 2018

हेलोजन

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पत्नी
पति से बोली
प्रिये....
तुम हमेशा बोलते हो
मैं दूसरी औरतों से कुछ खास हूँ
आज बता ही दो
कि
तुम्हें मुझमें
ऐसी कौन सी बात
खास नजर आती है
पति बोला
हेलोजन सी चमकती
तुम्हारी आँखें
चार महानगरों का
तापमान बताती हैं।

नौकरी का इंटरव्यू

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जब गरीबी और बेरोजगारी का दर्द सताता है
तब हर आदमी मजबूरी का फायदा उठाता है
आज नौकरी पा चुके हैं मेरे सभी यार
केवल मैं हूँ बेरोजगार
इसलिए
लोगों की नजरों में इडियट हूँ
किस किसको बताऊँ कि मैं पोस्ट ग्रेजुएट हूँ
लेकिन फिर भी
डगमगाती हुयी जिंदगी की नाव में
चपरासी के एकमात्र पद के लिये
इंटरव्यू देने हम भी पहुँचे मानसिक तनाव में....
ढोल की तरह पिटी हुयी
हमारी सूरत देखते हुये
चाय की चुस्कियाँ लेते हुये
मजाक के मूड में दिखा चयनकर्ता
और बोला
आओ मिस्टर गुप्ता....
क्या तुम बता सकते हो
कि
केले में गुठली क्यों नहीं होती ?
उसका बेतुका प्रश्न सुनकर
हमने कहा
यह कुदरत का काम है और
उसके काम में टांग अड़ाने की
अपनी हिम्मत नहीं होती।
वह फिर बोला
बैठ जाओ क्यों खड़े हो
और यह बताओ कितना पढ़े हो ?
हमने कहा
एम ए किया है
सुनकर हमारी शिक्षा
हमें नीचा दिखाते हुये
वह बोला हमारा मनोबल गिराते हुये
सही-सही बताओ
पढ़ाई की थी या नकल करके पास हुये....?
हमने कहा-
मोमबत्ती की रोशनी में पढ़कर
पूरी ईमानदारी से एम ए पास किया है
कॉलेज ही नहीं यूनिवर्सिटी टॉप किया है....
हमारा जबरदस्त कॉन्फीडेंस देखकर
उसने हमें भ्रमित करने का प्रयास किया
और कहा 
माना कि
तुमने एम ए किया है
लेकिन
हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और
बी ए क्यों पास नहीं किया है ?
हमने कहा श्रीमान्
आप भी कमाल करते हैं
इन परीक्षाओं के बाद ही तो एम ए पास करते हैं
लेकिन
आप हमसे व्यर्थ के प्रश्न क्यों कर रहे हैं
इंटरव्यू लेने की जगह मजाक कर रहे हैं....
हमारी इस बात पर वह चुप हो गया
और हमसे रूष्ट हो गया
लेकिन
इंटरव्यू में हमें फेल करने की
उसकी मंशा को हमने भांप लिया था
इसलिये
उसके प्रश्नों का उत्तर
उसकी ही भाषा में देने का हमने मन बना लिया था।
कुछ देर मौन रहकर वह फिर बोला
देखते हैं
भौगोलिक स्थितियों का है तुमको कितना ज्ञान
यह बताओ
कौन-कौन सी हैं भारत की तीन प्रसिद्ध खान
बिना झिझके
हम तुरंत बोले खड़े होके
आमिर खान, शाहरूख खान और सलमान खान।
इस बार
सुनकर हमारा उत्तर वह भड़क गया
और बोला हमें मत सिखाओ
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का
जन्म कहाँ हुआ था यह बताओ ?
हमने कहा-
उनका जन्म तो घर पर ही हुआ था
हमारे इस उत्तर से
चयनकर्ता के चेहरे पर जबरदस्त नाराजगी थी
लेकिन
हमने नाराजगी वाली कोई बात नहीं कही थी
क्योंकि
जब राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त पैदा हुये थे
उस समय नर्सिंग होम नहीं होते थे 
इसलिए
स्वभाविक है कि
उस समय बच्चे घर पर ही होते थे
हमारे इस जवाब से
चयनकर्ता को गुस्सा तो बहुत आया
लेकिन वह 
हमारा सब्र नहीं तोड़ पाया
और उसने तुरंत अगला प्रश्न घुमाया
सूरदास कौन थे ?
हमने कहा
सूरदास तो धृतराष्ट्र के वंशज थे
वह बोला कैसे थे ?
हमने कहा
क्योंकि
दोनों ही जन्मांध थे।
हमें हार नहीं मानता देखकर
चयनकर्ता बोला हमें घूरकर
लगता है
धृतराष्ट्र के बारे में कुछ ज्यादा ही जानते हो
इसलिए
उनके बारे में विस्तार से समझाओ
और यह बताओ
कि
धृतराष्ट्र के सौ बच्चे क्यों थे ?
हमने कहा
ये भी कोई सवाल है
इसका तो सीधा सा जवाब है
क्योंकि
वह अंधे थे
इसलिए
संतान उत्पत्ति के अलावा
कुछ नहीं कर सकते थे
और वो परिवार नियोजन
जैसा कोई भी प्रयोजन
नहीं मानते थे
ऐसे उपायों से कोसों दूर भागते थे  
इतना ही नहीं
उन्होंने कामदेव को भी सिद्ध किया था
तभी तो सैकड़ा बना लिया था
और सौ के बाद वह गिनती भूल गए थे
इसलिए
दूसरे शतक से चूक गए थे....
यदि आज धृतराष्ट्र जिंदा होते
तो गर्भनिरोधक साधन बेचने वाले भी
फूट-फूटकर रोते
और कल्पना करो कि
वंशानुक्रम के प्रभाव में
यदि धृतराष्ट्र के सभी बच्चे अंधे पैदा होते
तब इस देश की आबादी
जनगणना विभाग वाले कभी नहीं गिन पाते
हम आगे कुछ और कह पाते
हाथ जोड़कर
चयनकर्ता बीच में ही बोला हकलाते-हकलाते
माई बाप
चुप हो जाओ आप
आपके उत्तर मैं और सहन नहीं कर पाऊंगा
यदि
कुछ देर और रूका तो यहीं मर जाऊंगा
इसलिए
हो सके तो मुझे बख्शो
और अपनी नौकरी पक्की समझो

शुक्रवार, 2 मार्च 2018

वह औरत है

2 टिप्पणियाँ

उम्र को अंगूठा दिखाकर
दिनभर की भागम-भाग के बाद
घर लौटती है जब मजूरन
भूल जाती है
दिनभर की अपनी व्यस्तता
फिर
थकान को खूंटी पर टांगकर ...
एक-एक करके
चूल्हे में सरकाती है लकड़ियाँ और
लकड़ियों के साथ खुद जलकर
सबकी खुशी का रखती है ध्यान
क्योंकि
वह औरत है।  



गुरुवार, 21 सितंबर 2017

वोट डालने क्यों गए

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हे लोकतंत्र के दगाबाज
काले कारनामों के सरताज
हिंदु, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई
काहे के भाई
बताओ
यह कहकर तुमने धार्मिक आग क्यों लगाई?
तुम
घोटाले और भ्रष्टाचार के आरोप में
जेल में बंद रहकर भी
बिना प्रचार के
चुनाव जीत गए
दुःख होता है
हम वोट डालने ही क्यों गए॥1

अवैध संतानों के जन्मदाता
खुद को कहते हो भारत भाग्य विधाता
फिर
नारायणदत्त तिवारी वाली हरकत करते
तुम्हें जरा भी शर्म नहीं आयी
तुम्हारी लपलपाती जीभ देखकर
वह मजूरन
आज तक अपना आँचल नहीं ढक पायी
तुमने उसकी आबरू भी लूटी और
वोट मांगने भी गए
दुःख होता है
हम वोट डालने ही क्यों गए॥2

हे कामदेव के ईष्ट समर्थकों
आशाराम बापू और राम-रहीम के अनुयायी
बहू-बेटियों की इज्जत भी अब
तुमसे कहाँ सुरक्षित रह पायी
अपराध तुम करो 
धारा हम पर लगे
तुम पर
काहे की धारा काहे की रोक
तुम चाहे जिसका गाल छुओ तो कोई बात नहीं
हमने टमाटर छुये तो अपराधी हो गए
दुःख होता है
हम वोट डालने ही क्यों गए॥3

नगरपालिका की पानी की टंकी पर लगे
मधुमक्खी के छत्तों
बरसाती कुकुरमुत्तों
तुमने
फकीरी में जन्म लिया
जवानी गरीबी में बीती और
नेता बनते ही अमीर हो गए
इसलिए
तुम्हारी वसीयत के हकदार
केवल दो बच्चे ही लिखे गए
और जिन दर्जनों बच्चों की शक्ल तुमसे मिलती है
उनका क्या?
उन्हें तुम कैसे भूल गए
दुःख होता है
हम वोट डालने ही क्यों गए॥4

अर्थी के लिए बजते बाजों
शोकधुन पर थिरकने वाले धोखेबाजों
सत्ता पाकर हुए घमंडी
महाभारत के चालबाज शिखंडी
शहर में जब भी दंगा हुआ है
मजहब के नाम पर आदमी नंगा हुआ है
इसलिए
तुम्हारे एक इशारे पर कुछ लोग
गौ मांस का टुकड़ा मंदिर में फेंक गए
और कुछ लोग मस्जिद के बाहर
 नमः शिवाय लिखकर भाग गए
साम्प्रदायिक दंगों में हजार मरे
सरकारी आँकड़ों में सौ लिखे गए
वोट की खातिर तुम कितना गिर गए?
दुःख होता है
हम वोट डालने ही क्यों गए॥5

मौत का फरमान लिखे काले अक्षर
बंजर भूमि में शिलान्यास के पत्थर
जिन इमारतों का तुमने 
किया था शिलान्यास
दबकर उनमें 
सैकड़ों मजदूर मर गए
 कथनी अच्छी है तुम्हारी 
 करनी अच्छी है
फिर तुम 
उदघाटन करने ही क्यों गए
तुम्हारे दुष्कर्म देखकर
माँ-बाप भी सोचते होंगे
तुम 
पैदा होते ही क्यों नहीं मर गए
दुःख होता है
हम वोट डालने ही क्यों गए॥6