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बुधवार, 12 मई 2010

सुखद हवा का झोंका

1 टिप्पणियाँ
पिता की लाचारी
माँ की बीमारी
लकवाग्रस्त छोटी बहिन प्यारी
बेरोजगार बैठा छोटा भाई
और
घर की ढेरों जिम्मेदारी
ढेरों मानसिक तनाव
ऐसे में भी
मेरी ओर तुम्हारा (पत्नी का) झुकाव
तूफानी आंधी में
सुखद हवा का झोंका है।

मेरी इच्छा

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क्या कहा तुमने
मैंने
अपनी इच्छाओं को रोका है
मैंने
अपनी इच्छाओं को मारा है
अपने लिए कुछ भी नहीं सोचा
गलत हो तुम
और
तुम्हारी यह सोच
क्योंकि
मेरी इच्छाएं हैं
अपनी दैनिक मजदूरी में से
किसी तरह
बाबूजी का चश्मा बनवाऊं
माँ की पैबन्द वाली साड़ी बदलवाऊं
छोटे भाई को सहारा दूं
और
बहिन के हाथ पीले करके
असहाय माँ-बाप की जिम्मेदारी निभाऊं।

सदियों तक

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मैं चाहता हूं
कि
तुम इस घर में
तुलसी के घरवे पर
दीपक सी जलती रहो
क्योंकि
यहां लोग
जन्मते रहेंगे
मरते रहेंगे
लेकिन
तुलसी के घरवे पर
दीपक जलाने का क्रम
सदियों तक जारी रहेगा
मैं तुम्हें
सदियों तक देखना चाहता हूं।

बहेलिए से निवेदन

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बहेलिए
बंद पिंजरे में
पक्षियों की घुटन
तुम
क्या समझो
तुम्हे भी तो
बंद कमरों से बाहर
खुली हवा
अच्छी लगती है
इसलिए
पिंजरे का आकार
बढ़ाने की मत सोचो
पक्षियों को कर दो मुक्त
और
उड़ने दो उन्मुक्त
खुले गगन में।