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सोमवार, 22 मार्च 2010

भाग्य रेखा

तुम
एक स्पर्श हो
जिसे
मैं महसूस करता हूँ
तुम
एक अहसास हो
जिसे
मैं अपने निकट पाता हूँ
तुम
एक लम्बी श्वांस हो
जिसे
मैं अपने भीतर पाता हूँ
तुम
एक परछाईं हो
जिसे
मैं अपने समीप पाता हूँ
तुम
एक भाग्य रेखा हो
जिसे
मैं अपनी हथेली में पाता हूँ
और
मैं उस हथेली की
मुठ्ठी को बांध लेना चाहता हूँ
ताकि
तुम
बन्द मुठ्ठी में
भाग्य रेखा बनकर
मेरे साथ रहो।

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