ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है। मेरे समर्थक (Follower) बनकर मुझसे जुड़ें। मेरी पुस्तकें ऑनलाइन खरीदें अथवा संपर्क करें। WhatsApp: 9451169407 | 8953165089 | इस ब्लॉग की समस्त रचनाओं के © सर्वाधिकार सुधीर गुप्ता ‘चक्र’ के पास सुरक्षित हैं।

गुरुवार, 18 मार्च 2010

माँ की खातिर

गरीब माँ
होंसलों के पेड़ में
धैर्य के फल पकाती है
और
भूखे बच्चों की तसल्ली के लिए
पतीले में पत्थर उबालती है
चूल्हे में जलती
लकड़ी की तरह
माँ का दिल न जले
इसलिए
समझदार बच्चे भी
माँ की खातिर
झूठ-मूठ सो जाते हैं
इस तरह
माँ और बच्चे
एक-दूसरे की खातिर
सारा जीवन गुजार देते हैं।

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें