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शुक्रवार, 2 मार्च 2018

वह औरत है

3 टिप्पणियाँ

उम्र को अंगूठा दिखाकर
दिनभर की भागम-भाग के बाद
घर लौटती है जब मजूरन
भूल जाती है
दिनभर की अपनी व्यस्तता
फिर
थकान को खूंटी पर टांगकर ...
एक-एक करके
चूल्हे में सरकाती है लकड़ियाँ और
लकड़ियों के साथ खुद जलकर
सबकी खुशी का रखती है ध्यान
क्योंकि
वह औरत है।