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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

स्त्री

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उसने
आँख दिखायी
मैं सहम गयी
उसने
इशारा किया
मैं दौड़ी चली आयी
उसने
जो भी कहा
मैंने सुना
उसने
जो भी बताया
मैंने जाने बिना ही
सबकुछ मान लिया
उसके कहने
और
मेरे मानने में
बात थी सिर्फ इतनी
वो पुरूष था
और
मैं स्त्री।

परिभाषा

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शिक्षा की
कोई उम्र नहीं होती
कोई परिभाषा भी नहीं होती है
इसलिये
एक अनपढ़ स्त्री
पुरूष के मन की बैचेनी
आतुरता
लपलपाते होंठ
और
उसकी कामांध आँखों से
संभावित
बलात्कार को पढ़ लेती है।

संभावना

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जो
विषमता में भी
संभावना खोजती है
वही तो
स्त्री होती है।