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मंगलवार, 23 नवंबर 2010

उम्मीदें क्यों? (काव्य संग्रह)

कवि सुधीर गुप्ता "चक्र" के दूसरे काव्य संग्रह "उम्मीदें क्यों"? पर सुप्रसिद्ध कवि डॉ कुँअर बैचेन जी की
“टिप्पणी”
संक्षेप में कहा जाए तो सुधीर गुप्ता "चक्र" की कविताएँ कृष्ण-कन्हैया के उस सुदर्शन चक्र की भाँति हैं जो सभी विसंगतियों का तब तक पीछा करता है, जब तक वे विसंगतियाँ पराजित नहीं हो जातीं, जब तक उनका शीश धड़ से अलग नहीं हो जाता। "सुधीर" की कविताएँ "सुधार" की कविताएँ हैं।

2 टिप्पणियाँ:

'आकुल' ने कहा…

प्रिय भाई चक्र
मेरा और श्री रघुनाथ मिश्रजी का अभिनंदन स्‍वीकारें.
आपका ब्‍लॉग देखा. बहुत सुंदर लगा. फुरसत में पूरा पढ़ेंगे. श्रीमिश्रजी की दिल्‍ली, मेरठ और झाँसी की यात्रा की रिपोर्ट मेरे ब्‍लॉग पर पढ़ने के लिए समय निकालें. एसएमएस मिला होगा. प्रतिभा सम्‍मान के लिए बधाई. आकुल.

Satish Chandra Satyarthi ने कहा…

पिछले कुछ दिनों से ज़रा व्यस्त था.. आज नेट पर बैठा तो आपका ब्लॉग तसल्ली से देखा.. काफी सुन्दर है...
सबसे पहले आपको इस काव्य संग्रह के लिए बधाई......
बाकी कल फोन से बात करता हूँ..
और ये टिप्पणी से वर्ड वेरिफिकेशन वाला ओप्शन हटा दें तो अच्छा रहेगा .. इससे टिप्पणी करने में तकलीफ होती है...

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