ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है। मेरे समर्थक (Follower) बनकर मुझसे जुड़ें। मेरी पुस्तकें ऑनलाइन खरीदें अथवा संपर्क करें। WhatsApp: 9451169407 | 8953165089 | इस ब्लॉग की समस्त रचनाओं के © सर्वाधिकार सुधीर गुप्ता ‘चक्र’ के पास सुरक्षित हैं।

गुरुवार, 29 अप्रैल 2021

पुरूष प्रधान समाज

0 टिप्पणियाँ

पुरूष प्रधान समाज
स्त्री के
तन के अलावा
और कुछ नहीं पढ़ पाया
एक स्त्री के पास
तन के अलावा भी
बहुत कुछ है पढ़ने को
शायद
वेद-पुराणों से भी ज्यादा।

शनिवार, 24 अप्रैल 2021

डस्टबिन

0 टिप्पणियाँ

एक स्त्री को देखते ही
कामांध पुरूष
करता है उसकी देह का
गंदा मानसिक चित्रण
और
समा जाता है उसके मन में 
गंदे विचारों का ढेर सारा कचरा
तब सोचिए
एक पुरूष
अपनी सोच और विचारों से
क्यों नहीं जीत पाता है
क्योंकि
उसका मस्तिष्क
ओछे विचारों की गंदगी से भरी
डस्टबिन हो जाता है।

पीड़ा

0 टिप्पणियाँ

 एक स्त्री
सब कुछ जानती है
यहाँ तक की
पिंजरे में बंद
पंछी की पीड़ा को भी।

गुरुवार, 22 अप्रैल 2021

दो शब्द

0 टिप्पणियाँ

चरित्र
और
मर्यादा
ये दो शब्द
किसी अनपढ़ ने
अनायास ही गढ़े होंगे
अन्यथा
ये केवल स्त्री के हिस्से में ही क्यों आते ?


औरत.. सवालों के घेरे में

0 टिप्पणियाँ

औरत को
सवालों के घेरे में लेते हुए
उसने पूछा
औरत क्या है ?
तपाक से बोली वो
चट्टान पर उगती हुयी दूब ....।

बुधवार, 21 अप्रैल 2021

वह तोड़ती पत्थर

0 टिप्पणियाँ

वर्षों पहले
महाकवि निराला ने
लिखी थी कविता
वह तोड़ती पत्थर
वो बात
अभी तक चरितार्थ हो रही है
औरत
आज भी पत्थर तोड़ रही है।

आपदा

0 टिप्पणियाँ
जब
पृथ्वी का संतुलन बिगड़ता है
तब ही
आपदा आती है
कन्या भ्रूण हत्या भी
आपदा का संकेत है।