जब
मैले और फटेहाल
चीथड़ों में रहने वाली
इधर-उधर भटकती
सर खुजाती हुयी पागल औरत
किसी के पाप का बोझ उठाती है
तब
एक बात स्पष्ट नजर आती है
कि
वासना के आगे
सौंदर्य की भी हार हो जाती है।
कवि | लेखक | कथाकार | व्यंग्यकार | समीक्षक
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें