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शुक्रवार, 2 मार्च 2018

वह औरत है


उम्र को अंगूठा दिखाकर
दिनभर की भागम-भाग के बाद
घर लौटती है जब मजूरन
भूल जाती है
दिनभर की अपनी व्यस्तता
फिर
थकान को खूंटी पर टांगकर ...
एक-एक करके
चूल्हे में सरकाती है लकड़ियाँ और
लकड़ियों के साथ खुद जलकर
सबकी खुशी का रखती है ध्यान
क्योंकि
वह औरत है।  




3 टिप्पणियाँ:

शिवम् मिश्रा ने कहा…

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, अंग्रेजी बोलने का भूत = 'ब्युटीफुल ट्रेजडी'“ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Pammi singh'tripti' ने कहा…



आपकी लिखी रचना आज "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 7फरवरी 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

श्री नारायण ने कहा…

मार्मिक प्रस्तुति, रूपकों का अद्भुत मानवीकरण, उत्कृष्ट सार👍👏🙏👏

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