शहर
से एकदम अलग-थलग विकास को तरसता चमोली गाँव जहाँ लोग आने के लिए सौ बार सोचते हैं।
गाँव के लोगों ने आपस में धन एकत्रित करके राहगीरों के लिए वहाँ एक विश्राम गृह का
निर्माण करवाया और उसका उद्घाटन ग्राम प्रधान से करवाने का निर्णय सर्वसम्म्ति से
मान्य हुआ। लेकिन एकमात्र व्यक्ति संतोष विश्राम गृह का उद्घाटन प्रधान कि अपेक्षा
मंत्री जी से करवाने के पक्ष में था।
पहले
तो बिना जाने सभी संतोष की बात का विरोध करते रहे लेकिन जब उसने मंत्री जी से उद्घाटन
करने का लाभ बताया कि मंत्री जी जब गाँव में आएंगे तो शहर से गाँव तक की सड़क के
गड्ढे जिनके भरने के लिये हम महीनों से प्रयास कर रहे हैं वह अविलम्ब भर दिये
जाएंगे और मंत्री जी द्वारा उद्घाटन की खबर उनके साथ आये हुए मीडिया वाले अखबार और
टी वी में दिखाएंगे तो हमारे गाँव को एक नयी पहचान भी मिलेगी जिससे भविष्य में
दूसरी समस्याओं से छुटकारा मिलना भी आसान हो सकेगा। संतोष की सार्थक बात को सुनकर
प्रधान ने इसका अनुमोदन किया और सभी ने इसमें ही गाँव का निहित समझकर अपनी हामी भर
दी। अब सबको मंत्री जी के आने का नहीं बल्कि मंत्री जी के आने से सड़क के गड्ढे
भरने का इंतजार है। बुधवार, 26 अप्रैल 2017
टूटा चश्मा
माँ
ने आवाज दी बेटा पवन बहुत दिन से मेरा चश्मा टूटा हुआ है एक दाँत भी हिल रहा है। न
ठीक से देख पा रही हूँ और न ही ठीक से खाना खा पा रही हूँ। माँ की बात सुनकर पवन
ने अपनी पत्नी गीता की ओर देखते हुये दबे स्वर में कहा- माँ इस बार तुम्हारे पोते
राजू का एडमिशन करवाना है उसकी किताब-कॉपियों का खर्चा भी बहुत अधिक है। आप तो
जानती ही हो मुझे अभी कितने लोगों का उधार चुकाना है। अगले महीने कोशिश करूंगा।
तभी
दरवाजे की घंटी बजी गीता ने दरवाजा खोला और पवन से बोली सुनो जी,
बाहर वृद्धाश्रम से कुछ लोग चंदा मांगने आए हैं। कह रहे हैं एक लाख रूपये दोगो तो
आपके नाम से वहाँ एक कमरा बनवाया जायेगा जिससे लोग आपको सदियों तक याद करेंगे। मैं
तो कहती हूँ पुण्य के कामों में देरी नहीं करना चाहिए और फिर जरूरत पड़ने पर वृद्धाश्रम
के उस कमरे में तुम्हारी माँ भी तो रह सकती हैं। पवन ने गीता की हाँ में हाँ
मिलायी और तुरंत एक लाख रूपये का चेक वृद्धाश्रम के लिए दे दिया।
बेटे
और बहू की यह सब बातें सुनकर दाँत दर्द को सहते हुए माँ अपने पुराने और टूटे हुए
चश्मे को फिर से जोड़ने की कोशिश करने लगी।
महान विचार
आज
अशोक बहुत खुश था क्योंकि बहुत दिनों बाद वह माँ और पत्नी के साथ चाचा से मिलने
कानपुर जा रहा था। लगभग आधा रास्ता तय करने के बाद सामने से आते बेकाबू ट्रक से
उसकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। वह तो सकुशल बच गया लेकिन माँ और पत्नी को
अत्यधिक रक्त बहने के कारण पास के ही चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के लिए ले
जाया गया जहाँ डॉक्टर ने अशोक से दोनों के लिए एक-एक बोतल खून की व्यवस्था करने को
कहा। अशोक तुरंत बोला- डॉक्टर साहब मेरा ब्लड ग्रुप माँ और पत्नी के ब्लड ग्रुप से
मेच करता है इसलिए आप मेरा दो बोतल खून ले लीजिए। डॉक्टर ने दुर्घटना के कारण
भयभीत अशोक से कहा तुम्हारी हालत देखकर हम तुम्हारा एक बोतल से अधिक खून नहीं ले
सकते इसलिए यह बताओ कि पहले किसकी जान बचाएं।
एक माँ अपने पुत्र और एक पत्नी अपने पति के महान विचार जानकर हिम्मत से भर उठीं और बिना खून चढ़े ही डॉक्टर से कहा जिस माँ का ऐसा बेटा और जिस पत्नी का ऐसा पति हो उसे खून की जरूरत नहीं है कहते हुए छलछलाती हुयी आँखों से माँ और पत्नी दोनों अशोक का हाथ पकड़कर बाहर आ गयीं।
बुधवार, 24 फ़रवरी 2016
खिचड़ी
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बुधवार, फ़रवरी 24, 2016
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कविताएं (साहित्यिक)
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कंकड़ बीनने के बाद
बनी हुई खिचड़ी
तुम
बड़े चाव से खाते हो
क्या कभी सोचा है
औरत ने
खिचड़ी के साथ-साथ
तुम्हारी जिंदगी के भी
कंकड़ बीन लिये हैं।
बनी हुई खिचड़ी
तुम
बड़े चाव से खाते हो
क्या कभी सोचा है
औरत ने
खिचड़ी के साथ-साथ
तुम्हारी जिंदगी के भी
कंकड़ बीन लिये हैं।
आसन
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बुधवार, फ़रवरी 24, 2016
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कविताएं (माँ से संबंधित)
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माँ के कंधे पर
अपना चेहरा रखकर
मिट जाती है मेरी
मीलों लम्बी थकान
कोई योगाचार्य नहीं समझ सकता
कितना सुकुन मिलता है
मुझे इस आसन से।
अपना चेहरा रखकर
मिट जाती है मेरी
मीलों लम्बी थकान
कोई योगाचार्य नहीं समझ सकता
कितना सुकुन मिलता है
मंगलवार, 5 अगस्त 2014
"तुलसी सम्मान" से सम्मानित
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मंगलवार, अगस्त 05, 2014
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चित्र दीर्घा
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सोमवार, 26 मई 2014
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