ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है। मेरे समर्थक (Follower) बनकर मुझसे जुड़ें। मेरी पुस्तकें ऑनलाइन खरीदें अथवा संपर्क करें। WhatsApp: 9451169407 | 8953165089 | इस ब्लॉग की समस्त रचनाओं के © सर्वाधिकार सुधीर गुप्ता ‘चक्र’ के पास सुरक्षित हैं।

शुक्रवार, 30 अप्रैल 2021

स्त्री


उसने
आँख दिखायी
मैं सहम गयी
उसने
इशारा किया
मैं दौड़ी चली आयी
उसने
जो भी कहा
मैंने सुना
उसने
जो भी बताया
मैंने जाने बिना ही
सबकुछ मान लिया
उसके कहने
और
मेरे मानने में
बात थी सिर्फ इतनी
वो पुरूष था
और
मैं स्त्री।

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें