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बुधवार, 12 मई 2010

बहेलिए से निवेदन

बहेलिए
बंद पिंजरे में
पक्षियों की घुटन
तुम
क्या समझो
तुम्हे भी तो
बंद कमरों से बाहर
खुली हवा
अच्छी लगती है
इसलिए
पिंजरे का आकार
बढ़ाने की मत सोचो
पक्षियों को कर दो मुक्त
और
उड़ने दो उन्मुक्त
खुले गगन में।

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