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गुरुवार, 7 मार्च 2013

स्त्री-पुरूष

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तुम (पुरूष)
सहज सकते हो
केवल
अपना अहम्
वह (स्त्री) सहेजती है
पीड़ा‌ और दर्द

पुरूष शब्द
तुम्हारे मस्तिष्क
और
तुम्हारी सोच को
खाली कर चुका है
विपरीत इसके
स्त्री भरी रहती है हमेशा
अपनी आँखों में आँसू
क्योंकि
इकठ्ठा करना जानती है वह

भरी रहती हैं हमेशा
उसकी दोनों आँखें
इसलिए तो
पलकें नम रहती हैं
और
उसके सुख
जगह नहीं मिलने पर
लौट जाते हैं खाली हाथ

पुरूष से स्त्री का
भेद सिर्फ इतना है
कि
स्त्री
वह शब्द है
जब
कहा जाए
परिभाषा लिखो दुःख की
तो
मात्र एक शब्द ही पर्याप्त है
“स्त्री”।



शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

मैं और तुम

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मैं और तुम
अलग-अलग बिंदुओं से
शुरू होकर
रेल की पटरी की तरह
समानांतर चल रहे हैं
लेकिन
ऐसा क्यों
और
कब तक
क्यों न हम
एक-दूसरे पर लम्ब डालकर
सदा के लिए गले मिल जाएं
और
एक हो जाएं।

हिन्दी में उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित

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राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी 2013 को हिन्दी चलवैजन्ती पुरस्कार एवं विशेष रूप से "हिन्दी में उल्लेखनीय कार्य" के लिए बी एच ई एल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर श्री ए. के. दवे द्वारा पुरस्कार प्राप्त करते हुए दाएं से प्रथम स्थान पर कवि सुधीर गुप्ता "चक्र"

"उम्मीदें क्यों?" विश्व पुस्तक मेला में उपलब्ध

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मेरा पुरस्कृत काव्य संग्रह "उम्मीदें क्यों?" विश्व पुस्तक मेला में उपलब्ध

कवि सम्मेलन में काव्य पाठ

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4 जनवरी 2013 को भेल दिवस पर आयोजित "कवि सम्मेलन में काव्य पाठ" करते हुए।

अखिल भारतीय गुणता वृत्त प्रतियोगिता का "प्रतिष्ठित पुरस्कार" प्राप्त

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17 से 20 दिसम्बर 2012 को कानपुर में आयोजित अखिल भारतीय गुणता वृत्त के राष्ट्रीय सम्मेलन में "प्रतिष्ठित पुरस्कार" प्राप्त करते हुए बाएं से तीसरे स्थान पर कवि सुधीर गुप्ता "चक्र"

"हिन्दी साहित्य सेवा" के लिए सम्मानित

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16 दिसम्बर 2012 को झाँसी महोत्सव में "हिन्दी साहित्य सेवा" के लिए श्री गौरव दयाल जिलाधिकारी, झाँसी महानगर द्वारा सम्मानित किया गया।