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गुरुवार, 18 मार्च 2010

पत्नी और पाकिस्तान

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एक दिन मेरी भाग्यविधाता अर्थात मेरी एकमात्र श्रीमती जी सुबह-सुबह छ: बजे टी० वी० खोलकर पाकिस्तान टी० वी० चैनल का प्रोग्राम देखने लगी। मुझे लगा कि श्रीमती जी पाकिस्तान से कुछ ज्यादा ही प्रभावित हैं इसलिए पाकिस्तान टी० वी० का प्रोग्राम देख रही है। ऐसा सोचकर पत्नी को टी० वी० देखता छोड़कर मैं प्रतिदिन की भांति अपने कार्य पर चला गया।

सांयकाल पाँच बजे दिनभर शिकार की खोज में भटके हुए थके शिकारी सा चेहरा और थकान लिए मैं घर पहुँचा तो देखा, जीर्ण-शीर्ण द्वार पर किसी दूसरी चाबी से न खुलने वाला, आठ लीवर का हरीसन ताला लटक कर मेरी दयनीय स्थिति पर हँसता हुआ मजे से झूल रहा है और बन्द ताले में चलता टी० वी० मारूति उद्योग के निरन्तर बढ़ते लाभ की तरह, विद्युत विभाग को मेरी जेब से मारूति कार के पिकअप की तरह गति प्रदान कर रहा है। मैंने अनुमान लगाया कि टी० वी० भूलवश सुबह से ही अखण्ड रामायण के पाठ की तरह बिना रूके चल रहा है। क्योंकि पाकिस्तान टी० वी० का प्रोग्राम भला घंटों कोई क्यों देखेगा ? श्रीमती जी बस अब आने ही वाली हैं ऐसा सोच-सोचकर समय ठीक उसी तरह बढ़ता रहा जैसे रेलवे स्टेशन पर विलम्ब से आने वाली रेलगाड़ी का समय द्रौपदी के चीर सा बढ़ता चला जाता है।

अर्जुन के लक्ष्य चिड़िया की आँख की तरह ताले को अपना लक्ष्य बनाए हुए मुझे पूरे-पूरे दो घंटे हो चुके थे। अपने भाग्य को पिंजरे में बन्द चिड़िया की तरह कोसता ताला और राहू-केतू से घिरे जातक की तरह मैं, दोनों ही एक-दूसरे को चोर दृष्टि से घंटो घूरते रहे। अंततः पत्नी रूपी मेरी गाड़ी के आने का अनाउन्समेन्ट पड़ोसी के हकलाते बच्चे, पप्पू द्वारा किया गया। अंकल जी-अंकल जी, आंटी जी आने वाली हैं, सड़क के मोड़ तक आ चुकी हैं। इतना सुनते ही मैंने कड़कड़ाती सर्दी के मौसम में भी जेठ माह की तपती दोपहरी में मिले शीतल जल सा सुखद अनुभव किया। किन्तु अनाउन्समेन्ट होने के एक घंटे बाद तक भी जब श्रीमती जी नहीं आईं तो मुझे लगा कि मेरे भाग्य ने साढ़ेसाती से प्रभावित शनि ग्रह के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। तभी पड़ोसी का लड़का पप्पू मुझे बाहर देखकर बोला, अरे ! अंकल लगता है आंटी जी अभी तक नहीं आई हैं। मैं देखकर आता हूँ, ऐसा कहकर उसने मेरी दुखती नस पर हाथ रखा तो मैंने कहा- बेटा, विलम्ब से आने वाली रेलगाड़ी का समय कभी निर्धारित नहीं होता है। पाँच मिनिट बाद पप्पू ने टॉफी के लालच में मेरा दूत बनते हुए गुप्त सूचना दी कि आंटी जी चौराहे पर मिसेज शर्मा से बात कर रही हैं। मैं समझ गया कि मिसेज शर्मा ने मेरी गाड़ी की चेन पुलिंग कर दी है। अब मैं खुद को सेना द्वारा अपदस्थ किये गए राष्ट्रपति सा लाचार समझने लगा। क्योंकि मुझे अब डर लगने लगा था कि कहीं फिर से कोई अन्य महिला पुनः मेरी रेलगाड़ी की चेन पुलिंग न कर दे।

रात्रि के आठ बजकर बीस मिनिट और बत्तीस सेकेन्ड पर घनघोर अंधेरे में बिना नाल लगे घोड़े के टापों सी आवाज अर्थात पत्नी के पदचापों का हॉरर फिल्म की तरह भयभीत करने वाला किंतु सुखद स्वर सुनाई पड़ा। पत्नी को आते देख मेरा साढ़ेसाती शनि तुरन्त उतर गया और मुझे मन्नत मांगने पर प्रथम पुत्र प्राप्त होने सा सुखद अनुभव हुआ। लेकिन पड़ोसी के पप्पू ने पुनः गाड़ी प्लेटफॉर्म पर आने से ठीक पहले ही आउटर पर चेन पुलिंग कर दी और पूछने लगा कि आंटी जी आप कहां गईं थीं ? पप्पू ने मात्र कहाँ शब्द का ही स्विच दबाया था और बस श्रीमती जी द्वारा न रूकने वाले डबल हेड का नॉनस्टॉप टेप रिकॉर्ड चालू हो गया। बेटा- मैं फिल्म देखने गई थी, बड़ी अच्छी फिल्म थी कहते हुए श्रीमती जी ने बिना रूके विज्ञापन सहित पूरी फिल्म की कथा उस नन्ने बालक को सुना दी जो फिल्म का अर्थ भी नहीं जानता। मैं असहाय होकर पुनः गाड़ी के प्लेटफॉर्म पर आने की प्रतीक्षा करता रहा।

आखिर प्रतीक्षा की घड़ी समाप्त हुयी और नौ बजकर चालीस मिनिट पाँच सेकेण्ड पर पत्नी ने ताला खोलकर घर में प्रवेश किया। हमने भी मालिक के पीछे-पीछे जा रहे नौकर सा अनुसरण करते हुए घर में प्रवेश किया तो घंटो कतार में लगने के बाद मंगला आरती पाने और देवी दर्शन करने पर मिलने वाली सफलता जैसा सुखद अनुभव किया। फिर सर्वप्रथम मैंने दयाल बाग में अनवरत चलने वाले निर्माण कार्य की तरह पन्द्रह घंटे बीस मिनिट पाँच सेकेण्ड से बिना ब्रेक की रेलगाड़ी की तरह चल रहे पाकिस्तान टी० वी० के कार्यक्रम को बन्द करने के लिए रिमोट कंट्रोल उठाया तो अमेरिका की तरह वीटो पावर का प्रयोग करते हुए पत्नी बोली कि अब यह कभी बन्द नहीं होगा, ऐसे ही चलता रहेगा। मैंने कहा, क्यों बिजली का बिल बढ़ाकर पाकिस्तान की तरह मेरी आर्थिक व्यवस्था बिगाड़ रही हो। पुनः अपनी वीटो पावर का प्रयोग करते हुए वह गुस्से में बोली, चलने दो। इसमें आपका क्या जाता है ? मैंने कहा, इसमें केवल मेरा ही सब कुछ जाता है। नासमझ श्रीमती जी फिर बोली, लगता है आप चालीस वर्ष की आयु में ही सठिया गए हो। मैं गारंटी लेती हूँ कि आपका कुछ नहीं होगा जो होगा पाकिस्तान का ही होगा। मैंने कहा कि तुम्हें जिस अध्यापक ने गणित विषय पढ़ाया है, लगता है वह गणित का नहीं बल्कि चित्रकला का मेधावी छात्र रहा होगा। तुम ही बताओ किस विधि से पाकिस्तान का नुकसान होगा ? श्रीमती जी हमें बेवकूफ घोषित करते हुए बोलीं कि लगता है आप नकल करके पास हुए हो, क्या आप इतना भी नहीं समझते कि जब मैं पाकिस्तान टी० वी० चैनल का प्रोग्राम देखूंगी तो बिजली हमारी नहीं बल्कि पाकिस्तान की ही खर्च होगी और बिल भी उनका ही बढ़ेगा। इसलिए मैंने पाकिस्तान के विरूद्ध एकल युद्ध का संकल्प ले लिया है और जब तक पाकिस्तान कश्मीर भारत को नहीं सौंपता मैं इसी तरह टी० वी० चलाकर पाकिस्तान का बिजली का बिल बढ़ाती रहूँगी। मुझे पत्नी का भ्रम समझते देर नहीं लगी और मैंने कहा अरे पगली- टी० वी० अपना, बिजली का मीटर अपना, फिर बिजली उनकी नहीं अपनी ही खर्च होगी। घंटो तक असफल प्रयास करने के बाद भी जब यह बात श्रीमती जी की समझ में नहीं आई तो मैंने जैसे-तैसे मरीज की इच्छा के विरूद्ध उबली लोकी की सब्जी खिलाने जैसा कठोर निर्णय लेते हुए टी० वी० बेचकर अपनी अर्थव्यवस्था वाले ग्राफ को नीचे गिरने से पहले ही बचा लिया और अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को भगवान ही बचाएं।


बुधवार, 17 मार्च 2010

डॉक्टर का पत्र पत्नी के नाम (पुरस्कृत कविता)

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मेरी प्यारी एन्टीबायोटिक
सरला स्वराज
सुबह, दोपहर, शाम
प्यार की
तीन मीठी सी खुराक
डरता हूँ
इसलिए
विनम्र निवेदन करता हूँ
मुझ गरीब से तुम
क्यों दूर रहती हो इतना
स्टेन्डर्ड कम्पनी की महंगी दवाई
रहती है मुझसे जितना
मैं तुम्हारे प्यार का
हार्ट पेसेन्ट हूँ
सेन्ट परसेन्ट हूँ
ऐसा डॉक्टर ने बतलाया है
क्योंकि
एक्सरे में तुम्हारा चित्र
स्पष्ट नजर आया है
तुम्हारी जुदाई मुझे
ब्लड टेस्ट की सुई सी चुभ रही है
यह दूरी मुझे
दर्द निवारक इंजेक्शन की तरह
सहन नहीं होती
काश !
तुम मेरे पास होतीं ।
डॉक्टर की टॉर्च की तरह चमकती
तुम्हारी आँखें
स्टेथिस्कोप सी फैली
लचकदार बाँहे
रूई के फाहे की तरह
कोमल स्पर्श तुम्हारा
और
तेज बुखार में
थर्मामीटर की तरह बढ़ता
तुम्हारा
गुस्से का पारा
हमको भाता है
बहुत याद आता है ।
तुम
मायके जाने की खुशी में
गर्म पानी की थैली में भरे
पानी के समान
फूल रही हो
और मैं
तुम्हारी याद में
ग्लूकोज चढ़ रही
बोतल के समान
पिचकता जा रहा हूँ
चिपकता जा रहा हूँ ।
सच कहता हूँ
तुम मेरी
सभी रोगों की
एन्टीबायोटिक दवा हो
तुम्हारी कसम
तुम हो मेरे लिए
स्वर्ण भस्म ।
तुम
हमारी आपसी नोंक-झोंक को
अब भूल जाओ
और इसे
कैंसर या एड्स की तरह
लाइलाज मत बनाओ
अब लौट आओ
अब लौट आओ
अब लौट आओ।

घरेलू मंत्रीमंडल

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नई बहू
जब ससुराल आई तो
सास फूली नहीं समाई
लेकिन
भविष्य में बहू हावी न हो
सोचकर सास घबराई
तो उसने
कूटनीति से काम लिया
भारतीय नेताओं को आदर्श मान लिया
और
बहू से कहा
सुनो स्नेहा
मेरे पास इस घर का वित्त मंत्रालय है
तुम्हारे ससुर ने गृह मंत्रालय चुना है
बेटी योजना मंत्री और
छोटा बेटा विदेश मंत्री बना है
तुम्हारे पति ने
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री की भूमिका निभाई है
लेकिन
तुम कौन सा विभाग संभालोगी
अपनी योजना
अभी तक नहीं बताई है
तुम हमारी बहू हो
इसलिए
स्वयं अपना विभाग चुनो
हमने
यह अधिकार तुम्हें दिया है
चतुर बहु ने तुरन्त कहा
अब मंत्रीमंडल में कुछ नहीं बचा है
इसलिए
मैंने विपक्ष में बैठना पसंद किया है ।

फिल्मों का असर

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कमला ने
विमला से कहा
मुझे
फिल्म देखने से डर लगता है
सुना है
महिलाओं पर इसका
बुरा असर पड़ता है
क्योंकि
जब मैंने देखी थी फिल्म
“राम और श्याम”
मेरे होश उड़ गए
एक साथ
दो लड़के हो गए
सुनते ही विमला ने
कमला की बात को प्रमाणित करते हुए
अपनी चुप्पी तोड़ी
और
धीरे से बोली
मेरी तो मारी गई थी मती
मैंने भी देखकर फिल्म
“गंगा, यमुना और सरस्वती”
इस बात को परख लिया
क्योंकि
मुझे भी हुईं थीं
एक साथ तीन लड़कियाँ
यह सुनकर
पास खडी रानी
सुनाने लगी अपनी कहानी
और
मचाते हुए शोर
बोली
हाय राम
मेरा क्या होगा
मैंने तो देखी थी फिल्म
“अली बाबा और चालीस चोर” ।

कुकर

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कुकर में
चावल चढाने के बाद
पतिदेव घंटों खड़े रहे
सीटी के इंतजार में अड़े रहे
मगर
सीटी नहीं आई
तभी
बाजार से उनकी पत्नी आई
पत्नी के आते ही
कुकर ने
तुरन्त सीटी बजाई
यह देख
पतिदेव गुस्से में बोले
आजकल के
लड़के तो लड़के
कमबख्त
कुकर भी
अपनी हरकतों से बाज नहीं आते हैं
पत्नी के आते ही
तुरन्त सीटी बजाते हैं ।

पुलिस का हाथ

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दरोगा ने
फोटोग्राफर से कहा
सुनो मित्र
मेरा
खींचो एक चित्र
और
खड़ा हो गया केमरे के सामने
मूँछे तानकर
जेब में हाथ डालकर
यह देख मैंने
तुरन्त
फोटोग्राफर को रोका
दरोगा जी को टोका
और कहा
बात है बड़ी विचित्र
आप और चित्र
वह भी
जेब में हाथ डालकर
जब यह चित्र
जनता के बीच जाएगा
आम आदमी इसे पचा नहीं पाएगा
इस प्रकार
चित्र खिंचवाना
आपको शोभा नहीं देता है
क्योंकि
पुलिस वालों का हाथ
अपनी जेब में नहीं
दूसरों की जेब में होता है ।

ड्यूटी पर

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मेले में
अकेले में
खडी थी एक लड़की
तभी
एक आदमी आया
आते ही उसने
लड़की को हाथ लगाया
यह देख
दूर खड़े
उसके कुछ साथी
मुस्कुराने लगे
कुछ तो
वन्स मोर, वन्स मोर
चिल्लाने लगे
धीरे-धीरे
भीड़ बढ़ गई
छोटी सी बात
राई का पहाड़ बन गई
भीड़ देखकर
मैं भी वहां पहुँचा
और
दृश्य देखकर चौंका
एक पुलिस वाला
समाज का सेवक होकर
सुरक्षा चक्र को भेदने का
दुष्टतापूर्ण और घिनोना
प्रयास कर रहा था
भोली-भाली लड़की को
दिन के उजाले में
छेड़ रहा था
यह देख
मैंने हवलदार से कहा
हे प्रजातंत्र के
स्वतंत्र सिपाही
पुलिस विभाग के नियमों को
तोड़ने की कसम
आपने क्यों खाई ?
आपको, ऐसा करते
जरा भी लाज नहीं आई
माना
कानून आपके हाथ में है
लेकिन
क्या जनता आपके साथ में है
अरे
तुम तो
पुलिस वाले हो
जनता के रक्षक हो
तुम्हें
ऐसा नहीं करना चाहिए
अपने
अधिकारियों से डरना चाहिए
वह बोला
हम तो
कभी-कभी मजा लेते हैं
लेकिन
हमारे अधिकारी तो
हमेशा ही ऐसा करते हैं
इसलिए
हमें कोई डर नहीं है
फिलहाल हम
ड्यूटी पर नहीं हैं ।