शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013
हिन्दी में उल्लेखनीय कार्य के लिए सम्मानित
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"उम्मीदें क्यों?" विश्व पुस्तक मेला में उपलब्ध
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कवि सम्मेलन में काव्य पाठ
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अखिल भारतीय गुणता वृत्त प्रतियोगिता का "प्रतिष्ठित पुरस्कार" प्राप्त
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"हिन्दी साहित्य सेवा" के लिए सम्मानित
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प्रथम पुरस्कार
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बुधवार, 30 जनवरी 2013
जींस और टॉप
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कविताएं (साहित्यिक)
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हमें
न
जाने क्या हो गया
आपस
का प्यार खो बैठे
हमें
देख
हमारे
आधुनिक लज्जा वस्त्रों
जींस
और टॉप की भी
आपस
में ठन गई
और
जिद्दी
टॉप की
जींस
से दूरी बढ गयी
और
बढी...........
और
बढी...........
बढती
ही गयी
जींस
ने भी
सभ्यता
को चिढाकर
दूरी
बढाना शुरू कर दी
हद
कर दी
आपस
का मनमुटाव
मनमानी
करने लगा
और
सभ्यता
का हनन करके
संस्कृति
को रौंदने लगा
जींस
ने
नाभि
की सरहद पार कर ली
टॉप
भी
मनमानी
करके आगे बढ चला
बदतमीज
अपने
वक्षस्थल की सरहद पार करे
इससे
पहले
दोनों
में कितना प्यार था
बताना
होगा
समा
जाते थे एक-दूसरे में
साक्षी
है बेल्ट इस बात का
जो
रखता
था ध्यान इस बात का
कि
मर्यादा
उघारी न हो
इसलिए
खुश
होकर लिपट जाता था
दोनों
के केंद्र बिंदु कमर से
भारतीय
सभ्यता का बलात्कार हो
और
हमारे
संस्कार आत्महत्या करें
इससे
पहले
विपरीत
चल रहे
दोनों
बिंदुओं (जींस और टॉप) को
वृत्त
की परिधि में लाना होगा
क्योंकि
एक-दूसरे
के विपरीत
गतिशील
बिंदु
नकारात्मक
हों
तो
भी
वृत्त
में
एक
निश्चित स्थान पर
मिल
ही जाते हैं।
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