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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

अखिल भारतीय गुणता वृत्त प्रतियोगिता का "प्रतिष्ठित पुरस्कार" प्राप्त

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17 से 20 दिसम्बर 2012 को कानपुर में आयोजित अखिल भारतीय गुणता वृत्त के राष्ट्रीय सम्मेलन में "प्रतिष्ठित पुरस्कार" प्राप्त करते हुए बाएं से तीसरे स्थान पर कवि सुधीर गुप्ता "चक्र"

"हिन्दी साहित्य सेवा" के लिए सम्मानित

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16 दिसम्बर 2012 को झाँसी महोत्सव में "हिन्दी साहित्य सेवा" के लिए श्री गौरव दयाल जिलाधिकारी, झाँसी महानगर द्वारा सम्मानित किया गया।

प्रथम पुरस्कार

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गुणता माह नवम्बर 2012 में ध्येय वाक्य के लिए भेल, झाँसी के कार्यपालक निदेशक श्री ए के दवे द्वारा "प्रथम पुरस्कार" प्रदान किया गया।

बुधवार, 30 जनवरी 2013

जींस और टॉप

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हमें
न जाने क्या हो गया
आपस का प्यार खो बैठे
हमें देख
हमारे आधुनिक लज्जा वस्त्रों
जींस और टॉप की भी
आपस में ठन गई
और
जिद्दी टॉप की
जींस से दूरी बढ गयी
और बढी...........
और बढी...........
बढती ही गयी

जींस ने भी
सभ्यता को चिढाकर
दूरी बढाना शुरू कर दी
हद कर दी
आपस का मनमुटाव
मनमानी करने लगा
और
सभ्यता का हनन करके
संस्कृति को रौंदने लगा
जींस ने
नाभि की सरहद पार कर ली
टॉप भी
मनमानी करके आगे बढ चला
बदतमीज
अपने वक्षस्थल की सरहद पार करे
इससे पहले
दोनों में कितना प्यार था
बताना होगा

समा जाते थे एक-दूसरे में
साक्षी है बेल्ट इस बात का
जो
रखता था ध्यान इस बात का
कि
मर्यादा उघारी न हो
इसलिए
खुश होकर लिपट जाता था
दोनों के केंद्र बिंदु कमर से

भारतीय सभ्यता का बलात्कार हो
और
हमारे संस्कार आत्महत्या करें
इससे पहले
विपरीत चल रहे
दोनों बिंदुओं (जींस और टॉप) को
वृत्त की परिधि में लाना होगा
क्योंकि
एक-दूसरे के विपरीत
गतिशील बिंदु
नकारात्मक हों
तो भी
वृत्त में
एक निश्चित स्थान पर
मिल ही जाते हैं।

गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

माँ-बाप का साथ

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पुरानी सोच
और
पुराना घर
कहां तालमेल खाते हैं
जब
मत भिन्न हों
तो
मन भी भिन्न हो जाते हैं

अपनेपन को खत्म करके
नयेपन को प्राथमिकता देना
कहां की समझदारी है
इसलिए
पिता द्वारा रोपे गए
जिस नीम के पेड़ को
तुम
कटवाने की सोच रहे हो
वह विचार त्याग दो
क्योंकि
नीम की छांव
पिता का साया बनकर
तुम्हारे साथ रहेगी

भित्तियाँ तुडवाकर
दीवारें बनवाना तो
समझ आता है
लेकिन
सपाट दीवारें
समझ से परे हैं
जिन पर टंगेगीं
मॉडर्न आर्ट
जिसे
अबूझ पहेली की तरह
समझा नहीं जा सकता
और
आदिवासी चेहरों की पेंटिंग
चीनी ड्रेगन
या
फेंगशुई की लटकी होंगी घंटियाँ

इस तरह
ड्राइंगरूम की आधुनिक शोभा
केवल लटकी रहती है
और
लटकना आत्महत्या का प्रतिरूप है

समय के साथ
बदलाव आवश्यक है
लेकिन
सबकुछ बदलकर
भूगोल तो मिट सकता है
पर
इतिहास नहीं
क्योंकि
इतिहास मस्तिष्क में होता है
इसलिए
एक सुझाव और दूँ
नये घर में
सपाट दीवारों के साथ
कोने में ही सही
एक आला रहने दो
जहां
दीपक की रोशनी बनकर
माँ हमेशा तुम्हारे साथ होगी।

बुधवार, 5 दिसंबर 2012

नारी अंगों का प्रदर्शन

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तुम
चर्चित हो
कौन नहीं जानता तुम्हें
लोग जाते हैं देखने
तुम्हारी प्रदर्शिनी
जहां होता है केवल
नारी अंगों का प्रदर्शन
तुमने
जगतजननी नारी को निर्वस्त्र दिखाया है
उसके वास्तविक उभार और
परिपक्वता का
चरित्र हनन किया है
क्या यह
कोई अन्वेषण है तुम्हारा ?

अविकसित शरीर में
विकसित अंगों का
अशोभनीय प्रदर्शन
विवश करता है सोचने को
कि
क्या तुम्हें भी
एक नारी ने ही जन्म दिया है ?
मुझे तो लगता है 
तुमने
किसी नारी नहीं
अपितु अपनी
माँ, बहिन और
बेटी को ही
अपने हाथों निर्वस्त्र किया है

जिस स्त्री के स्तनों का
उभार तुमने दिखाया है
वह तुम्हारी माँ ही है
क्योंकि
स्तनों का उभार तो
तुमने अपने शिशुकाल में
माँ द्वारा कराए गए
स्तनपान के समय ही देखा था

यह भी समझ आ रहा है
कि
नारी के अविकसित अंगों की
समय से पहले परिपक्वता को दर्शाना
तुमने
अपने सामने बड़ी हो रही
बहिन को देखकर ही किया है

सच-सच बताओ ?
तुमने
अपनी माँ और बहिन का ही चित्रण किया है ना
बोलो !


अब इसके बाद
अपनी पत्नी और बेटी का भी
क्या ऐसा ही प्रदर्शन होगा ?
ये सामने की तस्वीर
जिसमें लड़की की नाभि और
लगभग पूरी खुली हुई टांगे
कंधों से उतरता बड़े गले का टॉप
यह सब तो
पश्चिमी सभ्यता की पक्षधर
तुम्हारी प्यारी बिटिया को ही तो पसंद है
बोलो !
क्यों चुप हो


पश्चाताप से झुका हुआ सिर
तुम्हारी स्तबधता और
बंधी हुई बत्तीसी देखकर
मैं समझ गया
कि
अब तुम कुछ नहीं बोलोगे
क्योंकि
जड़ हो गए हो।

रविवार, 18 नवंबर 2012

लंबा मौन

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लंबे समय तक
मौन
निश्चित विनाश का संकेत है
सौहार्दपूर्ण वातावरण
कभी भी
चढ‌ सकता है
आंतकियों के मस्तिष्क में
कट्टरपंथी
सेंक सकते हैं रोटियाँ
तुम्हारे-हमारे बीच
शांत इलाकों में
कभी भी
लग सकता है कर्फ्यू
केवल दो लोग
अनगिनत लाशों के
ठेकेदार हो सकते हैं
उन लाशों के
खुदा के बंदों को
बनाकर मोहरा
चलते हैं शकुनि चालें
और
हँसते हैं कुटिल हँसी
जेम्स वाट ने
रेल का इंजन बनाया
और
एडीसन ने
असफलता से
सफलता पाकर
बल्ब का आविष्कार किया
कट्टरपंथी मजहबी लोग भी तो
आविष्कार ही करते हैं
एक बम से
अधिक से अधिक
कितने लोग मर सकते हैं|